Thursday, 23 May 2013

मनः स्थिति

उलझे  नब्ज़  के  सुलझे  आधार  हैं ...
मझधार में नैया है टूटे पतवार हैं ...

Tuesday, 7 May 2013

...........आखिर तू क्यूँ इतना दूर है (in love with moon ;) )

छाया मुझपे तेरा ही सुरूर है
ए चाँद तू  आखिर क्यूँ इतना दूर है ...

मयंक, मृगांक , महताब के नाम से तू मशहूर है
यूँ  आके  तेरा चला जाना मुझे नामंजूर है ...

ए चाँद तेरी चांदनी ही तेरा गुरूर है
लगता है जैसे तू कोहिनूर है ...

तेरे साथ होने की ख़ुशी तो है…. पर साथ गम  भी जरूर है
...........आखिर तू  क्यूँ इतना दूर है