छाया मुझपे तेरा ही सुरूर है
ए चाँद तू आखिर क्यूँ इतना दूर है ...
मयंक, मृगांक , महताब के नाम से तू मशहूर है
यूँ आके तेरा चला जाना मुझे नामंजूर है ...
ए चाँद तेरी चांदनी ही तेरा गुरूर है
लगता है जैसे तू कोहिनूर है ...
तेरे साथ होने की ख़ुशी तो है…. पर साथ गम भी जरूर है
...........आखिर तू क्यूँ इतना दूर है