Friday, 2 November 2012

 सीपियों में संजोये सीप नायब जैसे तुम...
खिडकियों से छनके आती रुपहले धूप के  शबाब जैसे तुम...
अमावास के बाद चाँदनी बिखेरते  माहताब जैसे तुम...
है तमन्ना मिलो कभी मुझे मुकम्मल ख्वाब जैसे तुम .....

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