Tuesday, 7 May 2013

...........आखिर तू क्यूँ इतना दूर है (in love with moon ;) )

छाया मुझपे तेरा ही सुरूर है
ए चाँद तू  आखिर क्यूँ इतना दूर है ...

मयंक, मृगांक , महताब के नाम से तू मशहूर है
यूँ  आके  तेरा चला जाना मुझे नामंजूर है ...

ए चाँद तेरी चांदनी ही तेरा गुरूर है
लगता है जैसे तू कोहिनूर है ...

तेरे साथ होने की ख़ुशी तो है…. पर साथ गम  भी जरूर है
...........आखिर तू  क्यूँ इतना दूर है

2 comments:

  1. Wah Wah...likhne vale arman utar diye hai kagaj par !!!

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  2. wah! kya bat hai.. kuch aise hi alfaz chand ke pas bhi aapke liye hoga.. par wo bayan nahi kar pa raha hai..(due to connection prob.).

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