Tuesday, 17 September 2013

बेपरवाह....

न जाने कब, कैसे ..

पर तुम जो शामिल हुए ....अच्छा लगा !

यूँ तो कट ही रही है हसीन ख्वाबों में ज़िन्दगी ...

दो पल उन ख्वाबों को जी लेना ....अच्छा लगा !!

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